फरवरी महीने में इस चीज की खेती करें किसान भाई! होगी इतनी कमाई की नोट गिनते थक जाओगे
Kheti: रजनीगंधा (Tuberose) एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, जो भारत के उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में प्रमुख रूप से उगाई जाती है। रजनीगंधा के सुंदर सफेद फूल शादी-विवाह, पूजा-पाठ, तेल, और सेंट बनाने में उपयोग किए जाते हैं, जिसके कारण यह किसानों के लिए एक मुनाफेदार फसल बन चुकी है। रजनीगंधा की खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है, और इसका व्यवसायिक महत्व बढ़ता जा रहा है।
रजनीगंधा की रोपाई का सही समय और तरीका
रजनीगंधा की रोपाई आमतौर पर फरवरी से मार्च के बीच की जाती है। यह फसल उगाने के लिए धूप का बहुत महत्व होता है, क्योंकि रजनीगंधा को सही तरीके से विकसित होने के लिए सूर्य की किरणों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, रजनीगंधा के लिए उपयुक्त मिट्टी भी बहुत महत्वपूर्ण है।
मिट्टी की विशेषताएँ
मिट्टी प्रकार: दोमट मिट्टी
पीएच स्तर: 6.5 से 7.5
खाद: 500 क्विंटल गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर
रजनीगंधा की रोपाई के लिए उपयुक्त तरीका
रजनीगंधा की रोपाई कतारों में की जाती है, जहाँ कतारों के बीच की दूरी 30 से 40 सेंटीमीटर रखी जाती है। कंदों के बीच की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह मिले। प्रत्येक एकड़ में 40,000 से 50,000 कंद लगाए जाते हैं, और कंद को 5 से 7 सेंटीमीटर गहराई पर लगाना चाहिए।
रजनीगंधा की खाद और सिंचाई की आवश्यकताएँ
रजनीगंधा की फसल को उचित मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसे 200 किलो नाइट्रोजन, 75 किलो फॉस्फोरस, और 125 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देने की सलाह दी जाती है।
सिंचाई
गर्मियों के दौरान हफ्ते में दो बार सिंचाई करनी चाहिए। खासकर जब कंदों में जड़ और पत्तियों का विकास हो, तो पहली सिंचाई की जाती है। दो महीनों तक मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए।
रजनीगंधा की कटाई और उत्पादन
रजनीगंधा के फूलों की कटाई सुबह और शाम के समय की जाती है, जब फूल पूरी तरह से विकसित हो चुके होते हैं। एक हेक्टेयर में किसान 100 से 140 क्विंटल ताजे फूल और 150 से 180 क्विंटल कंद का उत्पादन कर सकते हैं।
रजनीगंधा की प्रमुख किस्में
डबल डबल पर्ल एक्सेलसर किस्म उच्च गुणवत्ता और अच्छे फूलों के लिए जानी जाती है। पर्ल लंबी अवधि तक फूलों का उत्पादन करने वाली किस्म माना जाता है।कलकत्ता डबल किस्म में अच्छे आकार के फूल होते हैं। मैक्सिकन सिंगल एक चक्र में फूल उगने वाली किस्म। एवरब्लूमिंग किस्म लगातार फूल देती है। मैक्सिकन कलकत्ता सिंगल किस्म हल्के रंग के फूल देती है।
