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Success Story of Sushmita Sharma: समाज के तानों ने बदल दी किस्मत, बिहार के छोटे से गाव की बेटी ने क्रेक की SSC CGL की परीक्षा 

 

khelorajasthan, Success Story of Sushmita Sharma: कहते हैं कि “इंसान की मेहनत और इरादों की ताकत किस्मत की लकीरों से भी बड़ी होती है।” बिहार की बेटी सुष्मिता शर्मा की कहानी इसका सबूत है।

ऐसे परिवार की दहलीज़ पर खड़ी सुष्मिता के लिए, जब समाज ने चूल्हा-चौका और जल्दी शादी का हुक्म दिया, तो उसने किताबें उठाईं। पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का हिम्मत वाला फैसला लिया।

रिश्तेदारों के ताने, शादी का सामाजिक दबाव और किडनी स्टोन जैसे शारीरिक दर्द को उसने रुकावट नहीं, बल्कि अपनी सीढ़ी बनाया। SSC CGL एग्जाम पास करके असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) बनीं। उनकी सक्सेस स्टोरी हर उस बेटी के लिए इंस्पिरेशन है जो अपने सपनों को पंख देना चाहती है।

सुष्मिता ने 10वीं कक्षा मैथ्स में 99 अंक हासिल किए 
 

सुष्मिता शर्मा बिहार से हैं। वह जोशटॉक के वीडियो में अपनी जर्नी शेयर करती हैं, कहती हैं कि वह एक कंजर्वेटिव मिडिल-क्लास फैमिली से हैं। शुरू में, उन्हें अपनी पढ़ाई में मज़ा नहीं आता था और वह अपनी पढ़ाई को लेकर सीरियस नहीं थीं।

एक बार एक ट्यूटर के कमेंट ने उनके सेल्फ-एस्टीम को हिला दिया।
बेइज्जती के बाद, उन्होंने खुद को साबित करने का फैसला किया और क्लास 10th में मैथ्स में 99 मार्क्स लाए। इस सफलता ने न सिर्फ उनका कॉन्फिडेंस बढ़ाया, बल्कि उन्हें आगे का रास्ता भी दिखाया।

छोटी उम्र में शादी तय

वह कहती हैं कि उनकी ज़िंदगी में टर्निंग पॉइंट तब आया जब 18 साल की उम्र में कॉलेज के पहले साल में उनके परिवार ने उनकी मर्ज़ी के बिना उनकी शादी तय कर दी। उन्होंने इसका विरोध किया और परिवार से अपने भविष्य के लिए 3-4 साल मांगे।

इस दौरान, रिश्तेदारों ने उन पर और उनके माता-पिता पर दबाव डाला। लोगों ने ताना मारा कि लड़कियों की नौकरी का इंतज़ार कौन करता है। इसके बाद भी, वह अपने लक्ष्य पर डटी रहीं और किसी तरह खुद को बचाकर आगे बढ़ीं।

बर्तन धोने, सरकारी नौकरी के सपने और तैयारी पर किताबें उठाईं

अक्सर उनके घर पर लोग उनकी माँ को बर्तन धोते हुए देखते और उन्हें टोकते हुए पूछते कि उनकी बेटी को काम करना क्यों नहीं सिखाया जा रहा है। लेकिन सुष्मिता की नज़रें अपने सपने पर टिकी थीं।

इसलिए कॉलेज के बाद उन्होंने किताबें उठाईं और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने SSC की तैयारी के लिए 8 से 10 घंटे पढ़ाई शुरू की। इस दौरान उन्हें समाज और रिश्तेदारों के ताने भी सुनने को मिले, जो उनकी पढ़ाई को बेकार मानते थे।