रोड एक्सीडेंट के नियमों को लेकर ड्राइवरों ने उठाई आवाज, अमित शाह ने कही बड़ी बात
Road Accident Rules: सड़क दुर्घटना के बाद भागने वालों की अब खैर नहीं. केंद्र की मोदी सरकार ने सड़क दुर्घटना में भागने वाले लोगों के लिए सख्त कानून बनाया है, जो जल्द ही लागू होगा। अब आप सड़क दुर्घटना करके भाग नहीं सकते, ऐसा करने पर कड़ी सजा हो सकती है, क्योंकि संबंधित कानून लोकसभा में पारित हो चुका है। दरअसल, जल्द ही लागू होने वाले नए कानून के मुताबिक, सड़क दुर्घटना कर भागने पर 10 साल की सजा होगी। हालाँकि, कुछ राहत के प्रावधान भी हैं।
दरअसल सड़क दुर्घटना जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है और नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति सड़क पर दुर्घटना होने के बाद घायल को सड़क पर छोड़कर भाग जाता है तो उसे 10 साल की सजा होगी. दूसरी ओर, यदि दुर्घटना करने वाला व्यक्ति घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाता है, तो उसकी सजा कम कर दी जाएगी। इस कानून की घोषणा गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में की।
पहले क्या था प्रावधान
इससे पहले, आईपीसी की धारा 104 में सड़क दुर्घटना के दौरान लापरवाही से हुई मौत या जल्दबाजी या लापरवाही से हुई मौत के अपराध के लिए दो साल की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। हालाँकि, नए कानून को लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जिसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।
कल संसद में क्या हुआ
लोकसभा ने बुधवार को तीन औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए विधेयकों को मंजूरी दे दी। लंबी चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के विस्तृत जवाब के बाद सदन ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) विधेयक, 2023 और भारतीय साक्ष्य (बीएस) विधेयक, 2023 को अपनी मंजूरी दे दी। ये तीन विधेयक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लेते हैं।
अमित शाह ने क्या कहा?
विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रस्तावित कानून 'व्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और सभी के साथ समान व्यवहार' के तीन सिद्धांतों के आधार पर पेश किए गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन किये जा रहे हैं, जो भारत के लोगों के हित में है. अमित शाह ने कहा कि सरकार ने इन विधेयकों के जरिए तीन आपराधिक कानूनों को गुलामी की मानसिकता से मुक्त कर दिया है. उन्होंने कहा, ''पिछले कानूनों के तहत ब्रिटिश राज की सुरक्षा प्राथमिकता थी, अब मानव सुरक्षा, देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।''
