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 एचडीएफसी बैंक ने एमसीएलआर दरें बढ़ाई, जानिए इसका असर आपके लोन पर क्या होगा?

7 फरवरी 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिक प्वाइंट की कटौती के बाद, यह उम्मीद की जा रही थी कि बैंक भी अपने ब्याज दरों में कटौती करेंगे। हालांकि, इसके विपरीत, एचडीएफसी बैंक ने अपने एमसीएलआर (MCLR) रेट्स में बढ़ोतरी कर दी है। अब, एचडीएफसी बैंक के ओवरनाइट एमसीएलआर में 5 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर इसे 9.20 फीसदी कर दिया गया है। अन्य अवधि की दरों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। यह नई दरें 7 फरवरी 2025 से लागू हो चुकी हैं।
 
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Bank News: 7 फरवरी 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिक प्वाइंट की कटौती के बाद, यह उम्मीद की जा रही थी कि बैंक भी अपने ब्याज दरों में कटौती करेंगे। हालांकि, इसके विपरीत, एचडीएफसी बैंक ने अपने एमसीएलआर (MCLR) रेट्स में बढ़ोतरी कर दी है। अब, एचडीएफसी बैंक के ओवरनाइट एमसीएलआर में 5 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर इसे 9.20 फीसदी कर दिया गया है। अन्य अवधि की दरों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। यह नई दरें 7 फरवरी 2025 से लागू हो चुकी हैं।

बैंक ने ओवरनाइट एमसीएलआर में बढ़ोतरी कर दी है. पहले यह दर 9.15 फीसदी थी, जिसे अब 5 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 9.20 फीसदी कर दिया गया है. हालांकि, बाकी सभी अवधि की दरें पहले ही तरह ही हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. ये नई दरें 7 फरवरी 2025 से ही लागू हो गई हैं. बता दें कि अब एचडीएफसी बैंक के एमसीएलआर 9.20 फीसदी से 9.45 फीसदी तक हो गए हैं.

अगर 1 महीने की बात करें तो 9.20 फीसदी ब्याज लिया जा रहा है. 3 महीने की अवधि का एमसीएलआर 9.30 फीसदी है. 6 महीने और एक साल के लिए एमसीएलआर दर 9.40 फीसदी है. वहीं दो और तीन साल के लिए एमसीएलआर 9.45 फीसदी है. MCLR भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से तय किया गया रेट है जो कॉमर्शियल बैंकों की तरफ से लोन की ब्याज दर तय करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. भारत में नोटबंदी के बाद से इसे लागू किया गया है. इससे ग्राहकों के लिए लोन लेना आसान हो गया है. 

MCLR वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है. दरअसल जब आप किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक की तरफ से लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है. अब इसी आधार दर की जगह पर बैंक MCLR का इस्तेमाल कर रहे हैं. 

MCLR न्‍यूनतम दर है, ऐसे में ये साफ है कि बैंक इसके रेट के नीचे ग्राहकों को लोन नहीं दे सकते यानी MCLR जितना बढ़ेगा, लोन पर ब्याज भी उतना ही ऊपर जाएगा. ऐसे में मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े लोन जैसे- होम लोन, व्हीकल लोन आदि पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी. 

हालांकि ऐसा नहीं है कि MCLR बढ़ते ही अगले महीने से आपकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी. यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि MCLR रेट बढ़ने पर आपके लोन पर ब्याज दरें तुरंत नहीं बढ़ती हैं. लोन लेने वालों की EMI रीसेट डेट पर ही आगे बढ़ती है.

बैंकों के लेंडिंग रेट्स की नीतिगत दरों के ट्रांसमिशन में सुधार लाने और सभी बैंकों की ब्‍याज दरों की निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के मकसद से MCLR को लागू किया गया. MCLR लागू होने के बाद से होम लोन जैसे लोन सस्‍ते हुए हैं. MCLR की गणना धनराशि की सीमांत लागत (Marginal Cost of Funds), आवधिक प्रीमियम (Period Premium), संचालन खर्च (Operating Expenses) और नकदी भंडार अनुपात (Cash Reserves Ratio) को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है. 

बाद में इस गणना के आधार पर लोन दिया जाता है. यह आधार दर से सस्ता होता है. बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने, एक साल और दो साल का एमसीएलआर घोषित करना अनिवार्य होता है. एचडीएफसी बैंक द्वारा एमसीएलआर दरों में वृद्धि का असर ग्राहकों की लोन लागत पर पड़ेगा। 

खासकर वे ग्राहक जिनके पास वर्तमान में होम लोन, वाहन लोन, या अन्य एमसीएलआर आधारित लोन हैं, उन्हें इस बदलाव का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि, यह बदलाव उनके लोन की रीसेट डेट से ही लागू होगा, इसलिए तुरंत प्रभाव से ईएमआई बढ़ने की संभावना नहीं है।