राजस्थान भाजपा पार्टी में आये नए अध्यक्ष, जानिए कौन हैं मदन राठौड़
Rajatshan News : राजस्थान भाजपा के राजनीतिक क्षेत्र में एक अहम मोड़ आया है, जब भाजपा नेता मदान राठौड़ को शनिवार को फिर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिया गया। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस चुनाव प्रक्रिया के अधिकारी के तौर पर इसकी पुष्टि की। राठौड़ की फिर से नियुक्ति पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जिसे कई राजनैतिक और जातिगत समीकरणों के आधार पर देखा जा रहा है।
मदान राठौड़ का राजनीतिक करियर
70 वर्षीय मदान राठौड़ पाली जिले के मूल निवासी हैं और राजस्थान भाजपा में उनके योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने 1970 के दशक में आरएसएस के प्रचारक के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की, और 1980 के दशक के मध्य में भाजपा से जुड़ गए। पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए वे राज्य इकाई तक पहुंचे।
राठौड़ ने पाली जिले की सुमेरपुर विधानसभा सीट से दो बार चुनाव जीते और दोनों बार उन्होंने कांग्रेस नेता बीना काक को हराया। इसके अलावा, वे 2014 से 2018 तक विधानसभा में भाजपा के उप मुख्य सचेतक भी रहे।
राठौड़ की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति
राठौड़ के लिए पार्टी के अध्यक्ष के रूप में चुनाव अधिकारी विजय रूपाणी द्वारा इसकी घोषणा की गई। शुक्रवार को राठौड़ ने पार्टी कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किया, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जैसे प्रमुख नेताओं ने उनका समर्थन किया। उनके पांच प्रस्तावकों में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे का नाम प्रमुख था, जो उनकी कड़ी पार्टी नीतियों को समर्थन देते हैं।
राजनीतिक समीकरण और जातिगत संतुलन
राठौड़ की नियुक्ति पर पार्टी सूत्रों ने यह भी बताया कि यह कदम जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। इस निर्णय का कारण यह था कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी दोनों ही ब्राह्मण थे, और इस स्थिति में राठौड़ की नियुक्ति से पार्टी में जातिगत संतुलन बना रहेगा।
राठौड़ का योगदान
राठौड़ ने 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आग्रह पर अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद उन्हें 2024 में राज्यसभा में पदोन्नत किया गया। पार्टी में उनके योगदान को लेकर उनके राजनीतिक समर्पण और अनुभव को सराहा जाता है।
