Success Story Prachi Chauhan: सरकार स्कूल मे पढ़ाई पूरी करके UPSC क्रैक कर बनीं IAS अफसर, कुछ ऐसी है IAS Prachi Chauhan की कहानी
khelorajasthan, Success Story Prachi Chauhan: मध्य प्रदेश के छोटे से गांव की लड़की, जिसे कॉलेज में UPSC के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी भी नहीं थी। परिवार में भी किसी को नहीं पता था कि यूपीएससी एग्जाम क्या होता है। आज वही किसान की बेटी IAS बनने जा रही है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2026 में 260वीं रैंक हासिल की। यह सक्सेस स्टोरी एमपी के गरीब किसान परिवार से आने वाली प्राची चौहान की है, जिन्होंने न सिर्फ देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल की है, बल्कि अनगिनत लड़कियों के मिसाल बन गई हैं।
छोटे से सरकारी स्कूल से पढ़ी लिखी है प्राची चौहान
प्राची चौहान मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के छोटे से गांव जौहद से हैं। प्राची के पिता चंद्रभान सिंह चौहान किसान हैं जबकि उनकी मां साधना सिंह चौहान हाउसवाइफ हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की।
दृष्टि IAS के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने सफर के बारे में बताया है। वह बताती हैं कि उन्होंने एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की जहां कोई बिल्डिंग नहीं थी, उन्हें एक पेड़ के नीचे बेंच लगाकर पढ़ना पड़ता था। लैब के नाम पर उनके पास एक छोटी सी अलमारी हुआ करती थी।
UPSC का नॉलेज नहीं था
प्राची ने UPSC की तैयारी तब करने का फैसला किया जब वह BSc के दूसरे साल में थीं। उनकी कहानी और भी दिलचस्प है क्योंकि लंबे समय तक प्राची को सिविल सर्विस के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी।
उन्हें इसके बारे में सरकारी ऑफिसों में जाने के दौरान पता चला, जहाँ उन्होंने कलेक्टरों द्वारा किए जाने वाले ज़रूरी काम देखे। वहीं से उन्हें प्रेरणा मिली। उनका कहना है कि उनके लिए UPSC का मतलब सिर्फ़ कलेक्टर की नौकरी था, उन्हें इसके सिलेक्शन प्रोसेस और तीन स्टेज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
घर की आर्थिक कमजोरी होने के कारण भी नहीं मानी हार
घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे बाहर जाकर कोचिंग कर पाते। इसके अलावा, परिवार पर समाज का दबाव अलग से था।
प्राची बताती हैं कि वह ऐसे समाज से आती हैं जहां माना जाता है कि अगर किसी लड़की को पढ़ने के लिए बाहर भेजा जाए तो कोई उससे शादी नहीं करेगा। उन्होंने सेल्फ-स्टडी के दम पर दूसरे और तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स तो क्वालिफाई कर लिया था, लेकिन सही गाइडेंस न मिलने के कारण मेन्स में निराशा हाथ लगी।
